सोमवार, 30 नवंबर 2020

खाट के बान कौन कसे बाबा : सुरेन्द्र कुमार

  


04 अगस्त 1972 को अहमदपुर जिला सहारनपुर उ0प्र0 में जन्में सुरेन्द्र कुमार ने हाल के वर्षों में गजल विधा में एक अलग मुकाम हासिल किया है। आम आदमी की पीड़ा को बड़े सिद्दत से महसूस किया है और उसे अपनी गजलों में अद्भुत तरीके से पिराने की भरपूर कोशिश की है या इसको यूं कहे कि कवि ने जिस यथार्थ को जिया एवं भोगा है को अपनी गजलों में जिवंत कर दिया है।

 आज प्रस्तुत है युवा कवि सुरेन्द्र कुमार की गजलें

1-

खाट के बान कौन कसे बाबा।
इस बार ठंड में चल बसे  बाबा।
मैं कच्चे मकान सा उदास रहा।
मुझको देखकर सब हंसे  बाबा।
हम तो धूल  पर  पड़े  रुमाल हैं।
हम  किसके दिल में सजे बाबा।
जंगल में गुजरते शेर को देखकर।
इधर  बचे बाबा उधर बचे बाबा।

2-

गेहूं बौना शुरू कर दूंगा धान कटने के बाद।
बिटिया का गोंना कर दूंगा धान कटने के बाद।
जब पुआल घर आएगी सर्दी से बच जाएगी।
गाय का सांथरा कर दूंगा धान कटने के बाद।
जब भी मिला पगडंडी पर मुंह फुलाए रहती थी।
उसको दीवाना कर दूंगा धान कटने के बाद।
 सपना सुहाना कर दूंगा धान कटने के बाद।
घर आना जाना कर दूंगा धान काटने के बाद।
बादल बे मौसम बरसने का रिश्वत मांगेगा।
अब कि बार समझौता कर लूंगा धान काटने के बाद।

 

 सम्पर्क -

अहमदपुर जिला सहारनपुर उ0प्र0
मोबा0- 06396401020

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