शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2020

उद्देश्यपरक कथ्य की सफल प्रस्तुति: उपन्यास - यारबाज़

 

यारबाज – उपन्यास

लेखक – विक्रम सिंह

प्रकाशक – लोकोदय प्रकाशन

पृष्ठ संख्या -112

मूल्य – 175 रुपए


 

 

 

 

 उद्देश्यपरक कथ्य की सफल प्रस्तुति: उपन्यास - यारबाज़

हंसा दीप

 

युवा लेखक विक्रम सिंह जी का उपन्यास पढ़ने की उत्सुकता बहुत दिनों से थी। वे बहुत अच्छे कथाकार हैं और उनकी कहानियों को पढ़ने का, पाठ करने का अवसर भी मुझे मिला है। बहुप्रतीक्षित “यारबाज” उपन्यास पढ़कर आज की युवा जिंदगी की बारीकियों से रूबरू होना मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहा।

दो दोस्तों की कहानी बेहद खूबसूरती से गाँव की राजनीति, कूटनीति और सत्ता की उठा-पटक का सजीव चित्रण करती है। साथ ही कई आर्थिक, सामाजिक व शैक्षणिक मुद्दों को भी सामने लाती है। बहुत ही सुंदर ढंग से कथ्य को पाठकों के सामने प्रस्तुत करके विक्रम जी ने अपने लेखकीय कला-कौशल का परिचय दिया है। संस्मरणात्मक शैली में लिखा गया यह उपन्यास वास्तव में कई ग्रामीण समस्याओं को पाठक के सामने एक-एक करके लाता है। आज की ग्रामीण परिस्थितियाँ किस कदर छुटभैये नेताओं और लाठी के जोर पर अपने रंग बदलती रहती हैं, इसका बेहतरीन खाका खींचा है विक्रम जी ने। दो दोस्तों की कहानी आगे बढ़ते हुए आसपास के कई पात्रों से परिचय करवाती है जो किसी न किसी तरह व्यवस्था के चंगुल में फँसे होते हैं।

कई अलग-अलग बिंदुओं पर चर्चा करते हुए लेखक का फोकस कहानी के मुख्य पात्र श्याम लाल यादव पर है, जो कई योग्यताओं के बावजूद आगे नहीं बढ़ पाता है। चाहे फिर वह खेल का मैदान हो या गणित के उलझे हुए सवाल हों। उसकी हर सक्षमता भी अच्छा काम दिलाने में अक्षम हो जाती है। अंतत: राजनीति में प्रवेश करके वह अपनी कामयाबी के दरवाजे खोल लेता है। अपने डिग्रीधारी दोस्त को भी अपने साथ सेक्रेटरी की नौकरी पर रखने की ख्वाहिश जताता है।

विक्रमसिंह जी के इस उपन्यास की खासियत है उनकी सरल और प्रवाहमयी भाषा। यही वजह है कि ग्रामीण वातावरण का सजीव आकलन करने में उन्हें सफलता हासिल हुई है। ऐसा लगता है कि लेखक ने अपने बीच से ही अपने पात्रों का चयन किया है। वे उन्हीं को जी रहे हैं व उन्हीं की भाषा-शैली में कथ्य को आगे बढ़ा रहे हैं। असल में यही एक उपन्यासकार की सफलता का द्योतक है।

यहाँ युवाओं की कई मुश्किलों को सामने लाने का सफल प्रयास नजर आता है। मसलन बेरोजगारी, कई अपरिहार्य कारणों से शिक्षा प्राप्त न कर पाने की विवशता, शिक्षा संस्थाओं तक न पहुँच पाने की मजबूरी आदि। अपने आसपास बढ़ता लाठी राज जो युवाओं को इसी रास्ते पर चलने के लिए मजबूर कर देता है। अपने मस्तमौला स्वभाव को ताक में रखकर किस तरह एक युवा रोजी-रोटी के चक्कर में पिसता है, इसका बखूबी बयान उपन्यास “यारबाज” करता है।

नि:संदेह यह एक उद्देश्यपरक कहानी है जो कई सामाजिक चरित्रों को, विसंगतियों को, दोस्ती के सही मायने को पाठक के समक्ष प्रस्तुत करती है। विक्रमसिंह जी की लेखकीय निपुणता इस कथा के बारीक तंतुओं को समेटकर एक यथार्थपरक उपन्यास को आकार देती है। भाषा-शैली और कथ्य का प्रभावी मिश्रण इसे बेहतरीन उपन्यास का खिताब देकर युवा लेखक की सफल कृति के रूप में पाठक के सामने लाता है।


संपर्क - Dr. Hansa Deep
1512-17 Anndale Drive,
North York, Toronto, ON – M2N2W7
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+ 647 213 1817
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